Sunday, 16 February 2014

फूल
महक, छुअन और
एहसास कुछ नही है
बस तुम हो

रात
चाँदनी, नमी और
कमी कुछ नही है
बस
तुम हो

वक़्त
आरज़ू, आज और
ख्वाब कुछ नहीं है
बस
तुम हो

ज़िन्दगी
बातें, दिन और
भविष्य कुछ नही है
बस
तुम हो

दिल
साँसे, जीवन और
ख़ुशी कुछ नही है
बस
तुम हो

मोहब्बत,
यादें, नज़ारे और
दुनिया कुछ नही है
बस
तुम हो

बस तुम हो….

11 comments:

  1. उस एक के अन्दर आपने अपना कितना-कुछ समा दिया है... इसे कहते हैं पूर्ण समर्पण।
    बहुत-बहुत बधाई, आदरणीया प्रियंका जी।

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    1. बहुत बहुत आभार सर ......

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  2. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (03-03-2014) को ''एहसास के अनेक रंग'' (चर्चा मंच-1540) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

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    1. शुक्रिया अभी जी ....

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  3. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने.....

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  4. एक से बढ़कर एक रचनाये पढ़ने को मिली आज मन खुश हो गया जी पहली पोस्ट पढ़ी और पढता ही चला गया पियु जी

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज कि देहलीज़ पर आये

    संजय भास्कर
    http://sanjaybhaskar.blogspot.in

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    1. संजय जी आपकी पसंदगी और सरहाना का बहुत बहुत आभार .............जी जरुर पढूँगी ......

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  5. khoobsurat bhavo ko khoobsurat shabd diye hai aapne ...

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    1. शुक्रिया कविता जी .....

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  6. बहुत सुन्दर...

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    1. धन्यवाद उपासना जी .....

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