Saturday, 30 March 2013

थक गयी हूँ मैं क्यूँ साथ लिए जाते हो
पल में हाथ थाम कर फिर क्यूँ झटक जाते हो

अँधेरा कर राह में दूर मंज़िल दिखाते हो
न जाने कैसे हो डर कर फिर खुद ही छिप जाते हो

एक आस बंधा कर झूठी तुम खेल खेलते हो
क्यूँ दिल को ही तुम अपना खिलौना बनाते हो

तेरी फितरत में ही छलावा था .....कितना छुपाते हो
क्यूँ भावनाओ का झूठा कारोबार चलाते हो

तुम अपनी शर्तों का पूरा हिसाब लगाते हो
एक पल के बदले में मेरी ज़िन्दगी मांगते हो

यही सोचती रही की मेरी ख़ुशी चाहते हो
कितनी गलत निकली तुम बस मेरी बर्बादी चाहते हो

Sunday, 24 March 2013

कैसे कह दूँ के मन बुन ले खुआब फिर नए ..
बीते खुअबों की राख अभी तक ठंडी हुई नहीं है …

एक नींद की चाहत में हर रात आंखे मलती हूँ
बीती टूटी नींद की चुभन अब तक दुखती रही है

किसी के आने का इंतज़ार जो तुम पर ख़तम हुआ था
बीते वेहम की वो चोट अभी तक भरी नहीं है

कैसे सजा लूँ मैं अपनी राहों के दर -दरवाज़े 
बीते जो गया वो अब तक लौटा नहीं है 

हाँ ये दीवानापन कहलायेगा मेरा
बिता एक पल जो आँखों से छलका नहीं है

अनजानी तलाश न जाने कब पूरी होगी 
बिता जो किस्सा वो अभी शायद ख़त्म हुआ नहीं है

Thursday, 14 March 2013

ज़िन्दगी-ए नज़्म अगर कह दूँ तो यूँ होगी
न जाने तुझ बिन पूरी ये कैसे होगी

हम तरसते ही रहेंगे बाकी उम्र
न जाने कब तेरे इंतज़ार की हद होगी

उम्मीद लगाये बैठे रहे एक पत्थर से
न जाने वो मूरत कब मोम होगी

मेरी रूह की तलब बढती ही जाती है
न जाने कब इसकी तड़प कम होगी

तेरा एक एहसास भर जो मेरे ज़ेहन से नहीं जाता 
न जाने कब मेरे वेहम की हक़ीकत होगी

Monday, 11 March 2013

नहीं पता मुझको तुम किस-किस बात पर याद आते हो
लेता नाम जब कोई मोहब्बत का ....हाँ मुझे तुम बहुत याद आते हो

न जाने कब, किस बात पर आँखों से आंसू आ जाते है
जब नाम दर्द का आता है........ हाँ मुझे तुम बहुत याद आते हो

ख़ुशी की कोई बात शायद याद नहीं मुझ को
मुस्कुराने की जब बात आती है ......हाँ मुझे तुम बहुत याद आते हो

हर दिन, हर पल गुज़र हे जाता है मगर
जब सुबह, शाम की बात चले ....हाँ मुझे तुम बहुत याद आते हो

आवाजों के शोर में एक मेरी आवज़ कहीं खो गयी
धडकनों की अगर आवाज़ आये ....हाँ मुझे तुम बहुत याद आते हो

किस्मत, नसीबो की कहानिया बहुत सुनी थी हमने
ज़िन्दगी की कहानी को जी कर.....हाँ मुझे तुम बहुत याद आते हो

Sunday, 10 March 2013

तुम मेरी लकीरों में न सही, मेरे दिल में तो हो
मेरे पास न सही मेरे तसवुर में तो हो

यहाँ कोई बंदिश नहीं तुम रह जाओ न यही
किसी की नहीं बस मेरी सुनो और अपनी कहो

रहना मेरी पनाहों में सो जाना नर्म छाओं में
देख लेना मेरी आँखों से जहाँ हसीन मंज़र हो

कर लेना बात पूरी जो कभी रह गयी थी अधूरी
आ भी जाओ के न जाने दूंगी फिर कुछ भी हो
कुछ यादें जो पीछा नहीं छोड़ती

कितना इन्हें बहा लिया अश्को में

ये बैचेन सायों सी पीछा करती है मेरा

कितनी बार भटकाया इनको .....फिर आ ही जाती है सन्नाटो में

बेचैन हूँ आज बहुत क्या कर रहे हो बातें मेरी

भूले तो नहीं मुझे क्या याद आती कभी मुलाकात हमारी

दुःख रहा है दिल क्यूँ बेसबब आज बहुत

क्या सुन रहे हो तुम धड़कने मेरी ….

Friday, 8 March 2013

khayalon ki mehfil lagi h aap bhi taan ched dijey
Jo zakhm abhi bhare nahi aaiye aap bhi unhe hawaa de dejey.....
Bahane ab muskurane k bhi yaad nahi aate mujhe
Ek teri yaad ne sab kuch bhula diya mujhe

Kabhi jo bin kaheey sun lete the tum
Ab wo tasavur bhi dhundlay lagte h mujhe

Bekhayali ka azab sa khumar hai yahan
Behlane ko ab koi nahi aata mujhe

Dekh lena agr tum durust samjho 
Khabar khud ko nahi meri ab mujhe…….

Thursday, 7 March 2013

Kuch yun aaya wo tufaan sa zindagi m meri
Khuabon ko banjar, raaton ko tanhayi... 
labon ko chubhan, Seene m khanzar or aankhon m gehre andhere de gaya…..

Wednesday, 6 March 2013


Dhadakta h jo seene m wo dil nahi....tum ho mujh m
dekho ab tak yahi ho .....yahi mujh main.....tum....